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| ग्रीन रिवर की अद्भुत जानकारी |
परिचय: गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती एक नदी
लाखों साल पहले पृथ्वी पर कुछ ऐसा हुआ जिसने वैज्ञानिकों को दशकों तक उलझाए रखा। सवाल था- जब ऊँचे पहाड़ रास्ते में थे, तो ग्रीन नदी ने उनके चारों ओर बहने के बजाय सीधे उनके बीच से रास्ता कैसे बना लिया?
अब नए शोध ने इस रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश की है। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि यह कहानी सिर्फ एक नदी की नहीं, बल्कि पृथ्वी की गहराइयों में होने वाली शक्तिशाली प्रक्रियाओं की है।{getToc} $title={Table of Contents}
ग्रीन नदी का अनोखा सफर
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ग्रीन नदी का उद्गम व्योमिंग में होता है और यह आगे चलकर यूटा के कैन्यनलैंड्स नेशनल पार्क में कोलोराडो नदी से मिलती है।
लेकिन इसकी सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 80 लाख साल पहले इस नदी ने 13,000 फीट ऊँची यूंटा पर्वत श्रृंखला के बीच से अपना रास्ता बना लिया।
सामान्यतः नदियाँ पहाड़ों के चारों ओर बहती हैं, लेकिन यहाँ नदी ने पहाड़ों को काट दिया। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे लंबे समय से विचित्र मार्ग मानते रहे हैं।
पहले के दो सिद्धांत और उनकी कमजोरियाँ
इस रहस्य को समझाने के लिए पहले दो प्रमुख परिकल्पनाएँ दी गई थीं, लेकिन दोनों में गंभीर कमियाँ थीं।
1. याम्पा नदी वाला सिद्धांत
कुछ वैज्ञानिकों ने माना कि दक्षिण की याम्पा नदी ने कटाव करके ग्रीन नदी के लिए रास्ता बनाया होगा।
समस्या:
याम्पा नदी इतनी शक्तिशाली नहीं मानी जाती
यदि यह सच होता, तो दुनिया की कई पर्वत श्रृंखलाओं में ऐसे उदाहरण मिलते।
लेकिन ऐसा नहीं देखा गया।
2. तलछट जमा होने का सिद्धांत
दूसरा विचार यह था कि भारी तलछट जमा होने से ग्रीन नदी अस्थायी रूप से ऊपर उठ गई और उसने पहाड़ों को पार कर लिया।
समस्या:
क्षेत्र में मिली तलछट की ऊँचाई लोडोर घाटी जितनी नहीं है
उपलब्ध भूवैज्ञानिक प्रमाण इस सिद्धांत का समर्थन नहीं करते
नया अध्ययन क्या कहता है?
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ब्रिटेन के ग्लासगो विश्वविद्यालय के शोधकर्ता एडम स्मिथ के नेतृत्व में किए गए नए अध्ययन ने एक अलग ही कहानी पेश की है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, असली कारण हो सकता है लिथोस्फेरिक ड्रिप।
क्या है लिथोस्फेरिक ड्रिप?
यह पृथ्वी के अंदर होने वाली एक जटिल भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है।
सरल भाषा में समझें
- पहाड़ों का भारी वजन पृथ्वी की पपड़ी पर दबाव डालता है
- दबाव से गार्नेट जैसे भारी खनिज बनते हैं
- ये खनिज नीचे की ओर टपकने लगते हैं
- इससे ऊपर का भूभाग नीचे धंस जाता है
परिणाम: पहाड़ अस्थायी रूप से नीचे बैठ जाते हैं और नदी उनके ऊपर से बह सकती है।
बाद में जब यह भारी पदार्थ मेंटल में समा जाता है, तो जमीन फिर ऊपर उठती है और आज की स्थलाकृति बनती है।
लोडोर घाटी: रहस्य की जीवित निशानी
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ग्रीन नदी लोडोर घाटी से गुजरती है, जहाँ इसने लगभग 2,300 फुट गहरी खाई बनाई है।
यह घाटी आज भी उस प्राचीन भूवैज्ञानिक प्रक्रिया का प्रमाण मानी जाती है जिसने वैज्ञानिकों को लंबे समय तक चकित किया।
क्या यह घटना और जगहों पर भी हो सकती है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि लिथोस्फेरिक ड्रिप कोई दुर्लभ घटना नहीं है।
- इसके संकेत एंडीज पर्वतमाला सहित कई क्षेत्रों में मिले हैं
- यह किसी भी पर्वत श्रृंखला के निर्माण के दौरान हो सकती है
- और यह किसी भी समय सक्रिय हो सकती है
इसका मतलब है कि पृथ्वी आज भी भीतर से बदल रही है।
शोध कहाँ प्रकाशित हुआ?
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यह महत्वपूर्ण अध्ययन 2 फरवरी को Journal of Geophysical Research: Earth Surface में प्रकाशित हुआ, जिसने भूविज्ञान की दुनिया में नई चर्चा शुरू कर दी है।
निष्कर्ष
ग्रीन नदी का यूंटा पर्वतों को चीरकर बहना कोई साधारण घटना नहीं थी। नए शोध से संकेत मिलता है कि पृथ्वी की गहराइयों में होने वाली लिथोस्फेरिक ड्रिप जैसी प्रक्रियाएँ सतह पर नाटकीय बदलाव ला सकती हैं।
यह खोज हमें याद दिलाती है कि पृथ्वी स्थिर नहीं है- वह लगातार बदल रही है, और उसके कई रहस्य अभी भी उजागर होने बाकी हैं।
