मौर्य साम्राज्य और सम्राट अशोक का स्वर्ण युग – भारतीय इतिहास की गौरवगाथा

मौर्य साम्राज्य और सम्राट अशोक का स्वर्ण युग दर्शाती आकर्षक ऐतिहासिक इमेज
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भूमिका

मौर्य साम्राज्य भारत का पहला विशाल, संगठित और शक्तिशाली साम्राज्य था। इस साम्राज्य ने पूरे भारत को राजनीतिक रूप से एकजुट किया और एक मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की। मौर्य वंश के शासकों ने न केवल अपने राज्य का विस्तार किया, बल्कि समाज, धर्म, शिक्षा और अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दी।

विशेष रूप से सम्राट अशोक का शासनकाल भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग माना जाता है। उनके द्वारा अपनाई गई अहिंसा, करुणा और धम्म नीति ने भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को प्रभावित किया। {getToc} $title={Table of Contents}

मौर्य साम्राज्य की स्थापना

मौर्य साम्राज्य की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 322 ईसा पूर्व की थी। उस समय भारत में नंद वंश का शासन था। चंद्रगुप्त ने अपने गुरु और सलाहकार चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से नंद वंश को पराजित किया और एक नए साम्राज्य की नींव रखी।

चाणक्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र मौर्य शासन की प्रशासनिक नीति का आधार था। इसमें कर व्यवस्था, सेना, न्याय और शासन प्रणाली का विस्तृत वर्णन मिलता है।

चंद्रगुप्त मौर्य का शासनकाल

चंद्रगुप्त मौर्य एक कुशल प्रशासक और वीर योद्धा थे। उन्होंने भारत के बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में लिया।

मुख्य उपलब्धियाँ:

  • शक्तिशाली सेना का गठन
  • सुदृढ़ प्रशासन
  • विदेशी आक्रमणों से रक्षा
  • सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस से संधि

उन्होंने यूनानी शासक सेल्यूकस को पराजित कर उत्तर-पश्चिम भारत को सुरक्षित किया।

अपने जीवन के अंतिम समय में उन्होंने जैन धर्म अपनाया और संन्यास ले लिया।

बिंदुसार का शासन

चंद्रगुप्त के बाद उनके पुत्र बिंदुसार गद्दी पर बैठे। उन्होंने साम्राज्य को दक्षिण भारत तक फैलाया।

बिंदुसार को “अमित्रघात” कहा जाता था, जिसका अर्थ है शत्रुओं का विनाश करने वाला।

उनका शासन शांतिपूर्ण और स्थिर माना जाता है। उन्होंने प्रशासन को मजबूत बनाए रखा और विदेशों से अच्छे संबंध बनाए।

सम्राट अशोक का प्रारंभिक जीवन

बिंदुसार के बाद अशोक मौर्य गद्दी पर बैठे। प्रारंभिक जीवन में अशोक कठोर और महत्वाकांक्षी शासक थे।

उन्होंने सत्ता प्राप्ति के लिए संघर्ष किया और कई युद्ध लड़े। वे एक शक्तिशाली सम्राट बनना चाहते थे।

शुरुआत में उन्हें “चंड अशोक” कहा जाता था, क्योंकि वे कठोर निर्णय लेते थे।

कलिंग युद्ध – जीवन का मोड़

कलिंग युद्ध (261 ईसा पूर्व) अशोक के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ था। इस युद्ध में लाखों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए।

युद्ध के बाद जब अशोक ने विनाश देखा, तो उनका हृदय परिवर्तन हो गया। उन्होंने हिंसा छोड़ने और शांति का मार्ग अपनाने का संकल्प लिया।

यह युद्ध उन्हें एक महान शासक बनाने की दिशा में ले गया।

बौद्ध धर्म और धम्म नीति

कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया। उन्होंने भगवान बुद्ध के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारा।

धम्म नीति के मुख्य सिद्धांत:

  • अहिंसा
  • करुणा
  • सत्य
  • दया
  • संयम
  • सहिष्णुता

अशोक ने इन मूल्यों को समाज में फैलाने के लिए पूरे साम्राज्य में प्रचार करवाया।

शिलालेख और स्तंभ

अशोक ने अपने संदेश पत्थरों और स्तंभों पर खुदवाए, जिन्हें शिलालेख कहा जाता है।

इन पर माता-पिता का सम्मान, जीवों पर दया, सत्य बोलना और धर्म का पालन करना लिखा था।

अशोक स्तंभ आज भी भारत की पहचान हैं। सारनाथ का सिंह स्तंभ भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।

प्रशासनिक व्यवस्था

मौर्य प्रशासन अत्यंत संगठित था। इसकी मुख्य विशेषता प्रांतों में विभाजन, राज्यपालों की नियुक्ति, न्यायालय प्रणाली, कर संग्रह व्यवस्था और गुप्तचर विभाग का गठन था।

अशोक ने न्याय और समानता पर विशेष ध्यान दिया।

समाज सुधार और लोक कल्याण

अशोक ने जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

उन्होंने अस्पताल बनवाए, कुएँ खुदवाए, सड़कें बनवाईं, धर्मशालाएँ बनवाईं और पशु चिकित्सालय खोले।

उन्होंने मानव और पशु दोनों के कल्याण पर जोर दिया।

विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंध

अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार विदेशों में भी किया।

उन्होंने श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार, चीन और ग्रीस में प्रचार के लिए अपने दूत भेजे।

उनके पुत्र "महेंद्र"  और पुत्री "संघमित्रा"  ने श्रीलंका में बौद्ध धर्म फैलाया।

मौर्य साम्राज्य का पतन

अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य साम्राज्य धीरे-धीरे कमजोर होने लगा।

मुख्य कारण कमजोर उत्तराधिकारी, विशाल साम्राज्य का प्रबंधन कठिन, आर्थिक दबाव और आंतरिक संघर्ष।

अंततः 185 ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य समाप्त हो गया।

मौर्य साम्राज्य का ऐतिहासिक महत्व

मौर्य साम्राज्य ने भारत को राजनीतिक एकता प्रदान की।

महत्व:

  • संगठित शासन
  • नैतिक प्रशासन
  • सामाजिक सुधार
  • अंतरराष्ट्रीय पहचान
  • बौद्ध धर्म का प्रसार

अशोक को आज भी “शांति का दूत” कहा जाता है।

आधुनिक भारत पर प्रभाव

अशोक के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं।

जो आज भी देखने को मिलता है जैसे: अहिंसा की नीति, लोकतांत्रिक सोच, सामाजिक न्याय और मानव अधिकार जैसी व्यवस्थाएं।

भारतीय संविधान में भी इन मूल्यों की झलक मिलती है।

निष्कर्ष

मौर्य साम्राज्य और सम्राट अशोक का शासन भारतीय इतिहास का सबसे उज्ज्वल अध्याय है। चंद्रगुप्त की राजनीतिक दूरदर्शिता, बिंदुसार की स्थिरता और अशोक की मानवता ने इस साम्राज्य को महान बनाया।

अशोक ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची शक्ति हथियारों में नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और सत्य में होती है। अगर आप इतिहास प्रेमी हैं तो इसी कड़ी में गुप्त काल के ऊपर एक पोस्ट है उसे भी देख सकते हैं।

JAY PANDEY

दोस्तों, नमस्कार, मैं JAY PANDEY एक ब्लॉगर हूं, जो 2015 से ब्लॉगिंग कर रहा हूं। मैं इतिहास, धर्म, जीवनी, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य आदि विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करुंगा। मेरा मिशन अपने पाठकों को सटीक और अच्छी तरह से शोध की गई जानकारी प्रदान करना है। धन्यवाद!

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