राक्षस और यक्ष की उत्पत्ति की पौराणिक कथा | रामायण से जुड़ी अद्भुत कहानी

राक्षस और यक्ष की उत्पत्ति की पौराणिक कथा में शिव पार्वती और सुकेश
राक्षस और यक्ष की उत्पत्ति की पौराणिक कथा में शिव पार्वती और सुकेश

हिंदू धर्मग्रंथों में राक्षस और यक्षों की उत्पत्ति से जुड़ी कई रहस्यमयी कथाएँ मिलती हैं। इनमें से एक अत्यंत रोचक कथा "रावण संहिता" में वर्णित है, जिसमें "भगवान श्री राम" और "अगस्त्य मुनि" के संवाद के माध्यम से यह रहस्य प्रकट होता है।

यह कथा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमें सृष्टि, धर्म और अधर्म के संतुलन की गहरी समझ भी देती है।{getToc} $title={Table of Contents}

भगवान राम और अगस्त्य मुनि का संवाद

जब भगवान राम वनवास के समय दक्षिण दिशा में पहुंचे, तब उन्होंने अगस्त्य मुनि से लंका और वहां निवास करने वाले राक्षसों के विषय में जानकारी प्राप्त की। राम ने पूछा कि लंका में राक्षसों का राज्य कैसे स्थापित हुआ।

अगस्त्य मुनि को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि सर्वज्ञ होते हुए भी राम यह प्रश्न कर रहे हैं। फिर उन्होंने राक्षस और यक्षों की उत्पत्ति की कथा सुनानी प्रारंभ की।

ब्रह्मा द्वारा जल की सृष्टि और जीवों का निर्माण

सृष्टि के प्रारंभ में "ब्रह्मा जी" ने जल की रचना की। इसके संरक्षण के लिए उन्होंने विभिन्न प्रकार के जल-जीव उत्पन्न किए।

लेकिन समय के साथ ये जीव भूख और प्यास से पीड़ित होने लगे। वे सभी ब्रह्मा जी के पास जाकर विनम्रता से अपनी समस्या बताने लगे।

ब्रह्मा जी ने उनसे कहा-

“तुम सब मिलकर इस जल की रक्षा करो।”

राक्षस और यक्ष नाम की उत्पत्ति

ब्रह्मा जी की बात सुनकर कुछ जीवों ने कहा-

“हम जल की रक्षा करेंगे।”

कुछ ने कहा-

“हम इसका यक्षण यानी पूजन करेंगे।”

तब ब्रह्मा जी ने निर्णय लिया और कहा- तुममें से 

जो जल की रक्षा करेंगे, वे "राक्षस" कहलाएंगे।

जो जल का पूजन करेंगे, वे "यक्ष" कहलाएंगे।

इसी प्रकार जीव दो वर्गों में विभाजित हो गए राक्षस और यक्ष।

हेति और प्रहेति: राक्षसों के प्रथम राजा

राक्षसों में हेति और प्रहेति नामक दो भाई हुए। ये दोनों अत्यंत शक्तिशाली और पराक्रमी थे।

प्रहेति धर्मात्मा थे और तपस्या के लिए वन चले गए।

हेति सांसारिक सुखों में लिप्त रहे और विवाह की इच्छा रखने लगे।

हेति ने "काल"  की भयानक पुत्री "भया"  से विवाह किया।

विद्युत्केश का जन्म

हेति और भया के विवाह से एक तेजस्वी पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसका नाम "विद्युत्केश" रखा गया। वह सूर्य के समान प्रकाशमान था और शीघ्र ही युवा हो गया।

हेति ने अपने पुत्र का विवाह "संध्या"  की पुत्री से कराया। यह कन्या अत्यंत सुंदर और शक्तिशाली थी।

विद्युत्केश और उसकी पत्नी का जीवन सुखमय था। शीघ्र ही उसकी पत्नी गर्भवती हुई।

सुकेश का जन्म और परित्याग

विद्युत्केश की पत्नी ने मंदराचल पर्वत पर एक पुत्र को जन्म दिया। यह बालक विद्युत के समान तेजस्वी था।

लेकिन दुर्भाग्यवश, माता ने उस नवजात शिशु को वहीं छोड़कर पुनः विद्युतकेश से मिलने चली गई।

बालक अकेला रोने लगा और उसका रोदन पूरे पर्वत में गूंजने लगा।

भगवान शिव-पार्वती की करुणा

उसी समय "भगवान शिव" और "माता पार्वती" आकाश मार्ग से जा रहे थे।

बालक के रोने की आवाज सुनकर पार्वती जी का हृदय करुणा से भर गया। उन्होंने शिव जी से उस बालक की रक्षा करने की प्रार्थना की।

शिव जी ने अपने दिव्य प्रभाव से उस शिशु को तुरंत युवा बना दिया और उसे अमरता का वरदान दिया।

सुकेश को दिव्य वरदान

पार्वती जी के आशीर्वाद से उस बालक का नाम "सुकेश" पड़ा।

उसे एक विशाल आकाशचारी विमान भी प्रदान किया गया। यह विमान किसी नगर के समान विशाल था।

पार्वती जी ने यह भी वरदान दिया कि:

भविष्य में राक्षस स्त्रियाँ शीघ्र ही गर्भधारण करेंगी।

उनके पुत्र तुरंत वयस्क हो जाएंगे।

इस वरदान से राक्षस जाति और अधिक शक्तिशाली हो गई।

सुकेश की महिमा और प्रभाव

वरदान प्राप्त कर सुकेश अत्यंत बलशाली बन गया। वह अपने विमान से पूरे लोकों में भ्रमण करने लगा।

वह देवराज "इन्द्र" के समान वैभवशाली हो गया।

उसका जीवन ऐश्वर्य, पराक्रम और प्रतिष्ठा से भरा हुआ था। आगे चलकर उसी वंश से लंकापति रावण जैसे महान पात्रों का जन्म हुआ।

ये सभी उदाहरण कथा को और अधिक प्रमाणिक बनाते हैं।

इस कथा का धार्मिक और नैतिक संदेश

राक्षस और यक्ष की उत्पत्ति की यह कथा हमें कई महत्वपूर्ण संदेश देती है:

1. कर्तव्य का महत्व

जो जीव जल की रक्षा के लिए आगे आए, वे राक्षस कहलाए। इससे पता चलता है कि कर्तव्य निभाना कितना आवश्यक है।

2. करुणा का प्रभाव

पार्वती जी की करुणा ने एक परित्यक्त बालक को महान बना दिया।

3. कर्म और भाग्य

हर जीव का भविष्य उसके कर्म और ईश्वरीय कृपा पर निर्भर करता है।

4. शक्ति का संतुलन

सृष्टि में शक्ति और धर्म का संतुलन बनाए रखने के लिए ही राक्षस और देव दोनों का अस्तित्व है।

निष्कर्ष

राक्षस और यक्षों की उत्पत्ति की यह कथा भारतीय पौराणिक साहित्य की एक अमूल्य धरोहर है। यह हमें सृष्टि की रचना, शक्ति के स्रोत और ईश्वर की करुणा का सुंदर चित्र प्रस्तुत करती है।

सुकेश की कहानी यह सिखाती है कि परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, ईश्वर की कृपा से जीवन नई दिशा पा सकता है।

यदि आप हिंदू पौराणिक कथाओं, रामायण से जुड़ी रहस्यमयी कहानियों और धार्मिक ज्ञान में रुचि रखते हैं, तो यह कथा आपके लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक है।

JAY PANDEY

दोस्तों, नमस्कार, मैं JAY PANDEY एक ब्लॉगर हूं, जो 2015 से ब्लॉगिंग कर रहा हूं। मैं इतिहास, धर्म, जीवनी, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य आदि विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करुंगा। मेरा मिशन अपने पाठकों को सटीक और अच्छी तरह से शोध की गई जानकारी प्रदान करना है। धन्यवाद!

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