आकाशगंगा के केंद्र से आ रहे रहस्यमयी संकेतों का स्रोत मिला? वैज्ञानिकों ने डार्क मैटर से जोड़ा संबंध

आकाशगंगा के केंद्र से आने वाले रहस्यमयी संकेत और डार्क मैटर का रहस्य
वैज्ञानिकों ने मिल्की वे के केंद्र से आने वाले तीन रहस्यमयी संकेतों को डार्क मैटर से जोड़ने की संभावना जताई है।

आकाशगंगा के केंद्र से आ रहे रहस्यमयी संकेतों का रहस्य

खगोलविदों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने हमारी आकाशगंगा के केंद्र से आने वाले तीन रहस्यमयी संकेतों के संभावित स्रोत का पता लगाने का दावा किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार इन संकेतों का संबंध एक विशेष प्रकार के डार्क मैटर से हो सकता है। यदि यह सिद्धांत सही साबित होता है, तो यह खोज ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। {getToc} $title={Table of Contents}

डार्क मैटर क्या है?

वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड में मौजूद कुल पदार्थ का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर से बना है। यह एक ऐसा रहस्यमयी पदार्थ है जिसे आज तक प्रत्यक्ष रूप से देखा नहीं जा सका है। इसके बावजूद वैज्ञानिकों को इसके अस्तित्व के मजबूत संकेत मिलते रहे हैं।

डार्क मैटर को समझने की आवश्यकता इसलिए भी है क्योंकि यह आकाशगंगाओं की संरचना और स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब खगोलविद विशाल सर्पिल आकाशगंगाओं का अध्ययन करते हैं, तो उन्हें यह पता चलता है कि उनमें दिखाई देने वाला पदार्थ इतना नहीं है कि वह आकाशगंगा को गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से एक साथ बांधे रख सके।

सामान्य परिस्थितियों में, इतनी तेज गति से घूमने वाली आकाशगंगाओं को टूट जाना चाहिए। लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं होता। इसका अर्थ है कि वहां किसी अदृश्य पदार्थ की मौजूदगी है जो अतिरिक्त गुरुत्वाकर्षण प्रदान करता है। इसी अदृश्य पदार्थ को डार्क मैटर कहा जाता है।

रहस्यमयी संकेतों की खोज

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खगोलविद लंबे समय से अंतरिक्ष में ऐसे संकेतों की तलाश कर रहे हैं जो डार्क मैटर के व्यवहार को समझने में मदद कर सकें। हमारी आकाशगंगा के केंद्र से आने वाले कुछ अज्ञात संकेत वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से पहेली बने हुए हैं।

पिछले शोधों में यह संकेत मिला था कि इनमें से एक संकेत संभवतः "उत्तेजित डार्क मैटर" नामक एक विशेष प्रकार के डार्क मैटर से जुड़ा हो सकता है। यह संकेत गामा किरणों में एक विशेष ऊर्जा स्तर पर दिखाई देता है जिसे 511 केईवी उत्सर्जन रेखा कहा जाता है।

हाल ही में किए गए नए अध्ययन में खगोलविद पहली बार इस प्रकार के डार्क मैटर को आकाशगंगा के केंद्र से आने वाले तीन अलग-अलग रहस्यमयी संकेतों से जोड़ने में सफल हुए हैं।

वैज्ञानिकों का क्या कहना है

इस अध्ययन के प्रमुख लेखकों में से एक, किंग्स कॉलेज लंदन के पोस्टडॉक्टोरल रिसर्च फेलो डॉ. श्याम बालाजी के अनुसार, आकाशगंगा के केंद्र से आने वाले संकेतों की पारंपरिक खगोलीय घटनाओं से पूरी तरह व्याख्या नहीं हो पाई है।

उनका कहना है कि तारों के विस्फोट जैसी घटनाएं इन संकेतों की ऊर्जा और उनकी संरचना को पूरी तरह समझाने में असफल रही हैं। हालांकि नए मॉडल से यह संभावना सामने आई है कि उत्तेजित डार्क मैटर इन संकेतों की व्याख्या कर सकता है।

उत्तेजित डार्क मैटर क्या होता है?

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वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तेजित डार्क मैटर तब उत्पन्न हो सकता है जब डार्क मैटर के कण आपस में टकराते हैं। इस टक्कर के कारण वे थोड़े समय के लिए एक उच्च ऊर्जा अवस्था में पहुंच जाते हैं और फिर उस ऊर्जा को मुक्त कर देते हैं।

जब यह ऊर्जा मुक्त होती है तो इससे पॉज़िट्रॉन नामक कण उत्पन्न होते हैं। पॉज़िट्रॉन मूल रूप से इलेक्ट्रॉन के समान होते हैं लेकिन उन पर धनात्मक आवेश होता है।

इन पॉज़िट्रॉनों को अंतरिक्ष दूरबीनों की सहायता से अप्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की अंतरिक्ष दूरबीनों द्वारा पहले भी इस प्रकार के संकेतों का अध्ययन किया गया है।

तीन रहस्यमयी संकेतों की व्याख्या

नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने मिल्की वे में पॉज़िट्रॉनों की गति और उनके प्रभाव का मॉडल तैयार किया। इसके आधार पर उन्होंने पाया कि उत्तेजित डार्क मैटर का यह सिद्धांत तीन अलग-अलग रहस्यमयी संकेतों को समझाने में मदद कर सकता है।

इन संकेतों में शामिल हैं

  1. 511 केवी गामा किरण उत्सर्जन
  2. लगभग 2 मेगा इलेक्ट्रॉन वोल्ट ऊर्जा वाला गामा किरण प्रकाश
  3. आकाशगंगा के केंद्र के पास गैस में असामान्य रूप से उच्च आयनीकरण

विशेष रूप से केंद्रीय आणविक क्षेत्र में गैस का असामान्य आयनीकरण लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य बना हुआ था।

कॉस्मिक किरणें भी नहीं दे पाईं जवाब

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अब तक वैज्ञानिकों ने इस आयनीकरण की व्याख्या कॉस्मिक किरणों जैसे संभावित स्रोतों से करने की कोशिश की थी। लेकिन वे इस प्रक्रिया को पूरी तरह समझाने में सफल नहीं हो सके।

नई रिसर्च के अनुसार यह संभव है कि इस आयनीकरण के पीछे डार्क मैटर की भूमिका हो।

भविष्य के अंतरिक्ष मिशन क्या बताएंगे

वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में नए अंतरिक्ष मिशन इस सिद्धांत की जांच करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विशेष रूप से वे मिशन जो कम ऊर्जा वाली गामा किरणों का अध्ययन करने के लिए बनाए जा रहे हैं।

इन मिशनों से मिलने वाले आंकड़े यह स्पष्ट कर सकते हैं कि क्या वास्तव में डार्क मैटर आकाशगंगा के केंद्र से आने वाले इन रहस्यमयी संकेतों के पीछे है।

ब्रह्मांड के रहस्य को समझने की दिशा में एक कदम

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शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि एक ही भौतिक प्रक्रिया अंतरिक्ष में लंबे समय से देखे जा रहे कई रहस्यमयी संकेतों की व्याख्या कर सकती है, तो यह भविष्य के शोध के लिए एक स्पष्ट दिशा प्रदान करेगी।

यदि डार्क मैटर से जुड़े यह संकेत सच साबित होते हैं, तो यह खोज न केवल हमारी आकाशगंगा बल्कि पूरे ब्रह्मांड की संरचना और विकास को समझने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

JAY PANDEY

दोस्तों, नमस्कार, मैं JAY PANDEY एक ब्लॉगर हूं, जो 2015 से ब्लॉगिंग कर रहा हूं। मैं इतिहास, धर्म, जीवनी, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य आदि विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करुंगा। मेरा मिशन अपने पाठकों को सटीक और अच्छी तरह से शोध की गई जानकारी प्रदान करना है।धन्यवाद!

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